Dev Sanskriti: Interdisciplinary International Journal (Jul 2015)
पातंजल योग सूत्र में अध्यात्म की वैज्ञानिक प्रक्रिया
Abstract
मनुष्य जीवन के गूढ़तम् रहस्यों को ज्ञात करने के लिये एवं जीवन को सार पूर्ण व्यतीत करने के लिये आध्यात्मिक ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है। अध्यात्म विज्ञान से मनुष्य को जीवन के उन गूढ़ रहस्यों का ज्ञान प्राप्त होता है जिसके माध्यम से मनुष्य, जीवन की जटिलतम् समस्याओं और परिस्थितियों का समाधान करने की योग्यता प्राप्त करता है। आधुनिक समय में जीवन के रहस्यों को समझने और अध्यात्म से सम्बन्धित विद्याओं को दार्शनिक और काल्पनिक कहकर नकार देने का प्रचलन बढ़ चला है। इसके अतिरिक्त अध्यात्म के नाम पर विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न प्रकार के प्रपंचों का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। आज के वैज्ञानिक युग में यदि अध्यात्म की वैज्ञानिकता को स्पष्ट कर अध्यात्म की वैज्ञानिक प्रक्रिया को जन साधारण के समक्ष प्रस्तुत किया जाये तो संभव है कि अध्यात्म के संदर्भ में जो विभिन्न नकारात्मक एवं मिथ्या बातें प्रचारित हैं उसे जन साधारण अस्वीकार करे। महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्रों में सामंजस्य और उससे उपजी समग्रता का मौलिक सृजन किया है। महर्षि पतंजलि द्वारा किया गया यह प्रयास सिर्फ बौद्धिक सूत्रों का ताना-बाना भर नहीं है। वह वेदों की ऋचाओं, उपनिषदों की श्रुतियों के दृष्टा की भांति क्रान्तिदर्शी प्रतीत होते हैं। महर्षि पतंजलि ने अनुभूतियों और उपलब्धियों की सर्वांगीण अभिव्यक्ति योग सूत्रों के माध्यम से दी है। महर्षि पतंजलि की दार्शनिक प्रणाली इसी सौंदर्य के कारण दर्शनीय है क्योंकि इसमें किसी प्रणाली अथवा उसमें निहित तत्वों की न तो अवहेलना है न ही उपेक्षा। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य जन साधारण को पांतजल योग सूत्र में वर्णित अध्यात्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत कराने के साथ-साथ अध्यात्म के वैज्ञानिक स्वरूप एवं अध्यात्म की वैज्ञानिकता को अवगत कराना है। Spiritual knowledge is essential and central for human beings to unveil the deepest secrets of life and to live life earnestly. Spiritual science provides knowledge of the deep mysteries of life through which man is able to overcome the complex problems and situations of life. In modern times, the trend of understanding the mysteries of life and rejecting the disciplines related to spirituality as philosophical and imaginary has increased. Apart from this, in order to promote various business activities in the name of spirituality, the prevalence of different types of systems is increasing. In today's scientific era, if the scientific process of spirituality is presented to the general public by clarifying the scientificness of spirituality, then it is possible that the public can reject the various negative and false things which are propagated in the context of spirituality. Maharishi Patanjali has created a fundamental creation of harmony and totality arising out of his Yoga Sutras. This effort by Maharishi Patanjali is not just a fabrication of intellectual sources. He seems to be a revolutionist like the vision of the Vedas, the hymns of the Upanishads. Maharishi Patanjali has given all-round expression of feelings and achievements through Yoga Sutras. The philosophical system of Maharishi Patanjali is visible because of this beauty because there is neither neglect nor neglect of any system or elements contained in it. The purpose of the presented research paper is to make the general public aware of the true nature of spirituality described in the Panthjal Yoga Sutra, as well as to convey the scientific form of spirituality and the authenticity of spirituality.
Keywords